Dhari Devi Temple Uttarakhand : की प्रतिमा दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है। - bimaloan.net
Uttarakhand

Dhari Devi Temple Uttarakhand : की प्रतिमा दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है।

Dhari Devi Temple Uttarakhand की मूर्ति दिन में अपना स्वरूप तीन बार बदलती है। प्रातः काल वह एक लड़की की तरह दिखती है; फिर मध्यान्ह में एक औरत और साय काल को एक बूढ़ी औरत के रूप में दिखती है।

भारत रहस्यों एवं आकर्षण का देश है, खासकर जब हम यहां अपने देवताओं और मंदिरों की बात करते हैं। वास्तव में, देश के बहुत से मंदिरों के आसपास के “रहस्य” ने विज्ञान एवं भौतिकी के मानदंडों को भी चुनौती दी है। ऐसी ही एक रहस्यमयी कहानी है उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर क्षेत्र के पास स्थित Dhari Devi Temple Uttarakhand की। दिलचस्प बात यह है कि ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में देवी धारी देवी की मूर्ति दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है।

Dhari Devi Temple Uttarakhand : की प्रतिमा दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है।
Dhari Devi Temple Uttarakhand : की प्रतिमा दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है।

” जी हाँ! आपने सही पढ़ा है। देवी काली का ही एक रूप मानी जाने वाली Dhari Devi की प्रतिमा दिन में तीन बार अपना स्वरूप बदलती है। सुबह वह एक लड़की की तरह दिखती है; फिर दोपहर में एक महिला और दिन के अंत तक एक बूढ़ी औरत में बदल जाती है।”

Dhari Devi को कल्याणेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है और इनको उत्तराखंड की संरक्षक देवी माना जाता है। उन्हें “चार धामों की रक्षक” भी माना जाता है। Dhari Devi Temple Uttarakhand के इस मंदिर से जुड़ी कुछ मान्यताओं एवं भ्रांतियों का खुलासा करते हुए मंदिर के पुजारी मनीष पांडे जी ने बताया कि Dhari Devi को द्वापर युग की मां भी कहा जाता है।

Divine Place to Visit in Uttarakhand : जाने इन रमणीय स्थलों के बारे में ?

Dhari Devi Temple Uttarakhand : धारी देवी के विभिन्न नाम.

” यह मंदिर दक्षिण काली मां का मंदिर है, जिसे गांव के नाम के कारण से ‘Dhari Devi’ नाम मिला। यह मंदिर श्रीनगर से थोड़ी दूरी पर स्थित Dhari गांव में है जो अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है, यह द्वापर युग का सबसे पुराना शक्तिपथ मैं से एक है।” समाचार एजेंसी एएनआई ने पुजारी के हवाले से कहा था।

“Dhari Devi को ‘द्वापर युग की माता’ के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि मंदिर की प्रतिमा को द्वापर युग के दौरान स्थापित किया गया था एवं पांडवों के द्वारा यहां पूजा की जाती थी। माना यह जाता है कि Dhari Devi की पूजा आदि गुरु शंकराचार्य जी भी करते थे।’ ऐसा माना जाता था कि लोग ‘रक्षा कवच’ के लिए प्रार्थना करने जाते थे एवं उनकी मनोकामना पूरी होती थी। इसलिए उन्हें ‘चार धाम की रक्षक’ भी कहा जाता है।”

Dhari Devi Temple Uttarakhand : की प्रतिमा दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है।
Dhari Devi Temple Uttarakhand : की प्रतिमा दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है।

Dhari Devi Temple Uttarakhand : अंधविश्वास या गलत धारणा ?

एक अंधविश्वास के रूप में गांव के स्थानीय लोग के द्वारा यह तक माना जाता हैं कि यदि धारी देवी को नाराज किया जाता है तो भारी विनाश होता है। विशेष रूप से, इन सबका विश्वास सच हुआ जब केदारनाथ घाटी भीषण आपदा की चपेट में आ गई, जिससे बहुत अधिक नुकसान हुआ, क्योंकि जल-विद्युत परियोजना के कारण मंदिर की मूर्ति को दूसरी जगह रखा जा रहा था उसके कुछ घंटे बाद ही है केदारनाथ की आपदा आई।

हालांकि, Dhari Devi Temple Uttarakhand के पुजारी के द्वारा इस धारणा को एक “गलत धारणा” करार दिया गया है और कहा कि एक जल-विद्युत परियोजना के निर्माण कार्य के कारण मूर्ति को हटा दिया गया था। “स्थानीय लोग के द्वारा बाढ़ की घटना को देवी से जोड़ते हैं लेकिन हमें ऐसा नहीं लगता। हम यह अंधविश्वास नहीं फैलाना चाहते हैं कि बाढ़ इसलिए आई क्योंकि देवी को स्थानांतरित कर दिया गया था। यह देवी का मंदिर है जिनकी शांत रूप में पूजा की जाती है। वह देवी हैं जो स्वयं चारों धामों की रक्षक हैं, तो वह इतने लोगों की जान कैसे ले सकती हैं?”

Related Articles

Back to top button
उत्तराखंड : धामी ने भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का आह्वान किया Anant & Radhika Engagement pictures Italian actress Gina Lollobrigida dies at 95 Kartik Aaryan and Kriti Sanon Upcoming Movie Shehzada Miss Universe 2022: USA’s R’Bonney Gabriel