Pahadi Cuisine of Uttarakhand के साथ अपने स्वाद को निखारें . - bimaloan.net
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Pahadi Cuisine of Uttarakhand के साथ अपने स्वाद को निखारें .

Pahadi Cuisine of Uttarakhand : जहां उत्तराखंड अपनी सुंदर एवं ऊंची हिमालय की चोटियों एवं सुंदर मौसम के लिए फेमस है उसके साथ-साथ यदि हम यहां के पहाड़ी व्यंजनों ( Pahadi Cuisine ) की बात करें तो वह भी स्वादिष्ट एवं पौष्टिक होते हैं। जो गढ़वाली और कुमाऊं क्षेत्रों के लिए स्वदेशी है।

उत्तराखंड में राज्य स्थापना दिवस हर वर्ष 9 नवंबर को मनाया जाता है। उत्तराखंड भारत का 27 वां राज्य है यह उत्तर भारतीय राज्यों में आता है। 2007 में राज्य का नाम उत्तरांचल से उत्तराखंड रखा गया। जहां उत्तराखंड अपनी सुंदर एवं ऊंची हिमालय की चोटियों एवं सुंदर मौसम के लिए फेमस है उसके साथ-साथ यदि हम यहां के पहाड़ी व्यंजनों ( Pahadi Cuisine ) की बात करें तो वह भी स्वादिष्ट एवं पौष्टिक होते हैं। जो गढ़वाली और कुमाऊं क्षेत्रों के लिए स्वदेशी है।

उत्तराखंड अपने नाम के अनुरूप ” देवताओं की भूमि ” के रूप में जाना जाता है और यहां देश एवं विदेश से लाखों की संख्या में प्रतिवर्ष पर्यटक लोग आते हैं राज्य मैं समृद्धि प्राकृतिक संसाधनों जैसे सुरम्य हिमनद, नदियाँ और बर्फ से ढकी चोटियाँ हैं। यह स्थान देश के सबसे पवित्र हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक है क्योंकि यहां विश्व प्रसिद्ध चार धाम – बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के चार मंदिर हैं।

जहां उत्तराखंड की वादियां मैं घूम के आप आनंदित होते हैं उसी प्रकार यहां का स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन भी आपको आनंदित करता है अगली बार जब भी आप उत्तराखंड आए तो आपको कौन से पहाड़ी व्यंजनों ( Pahadi Cuisine ) का आनंद लेना चाहिए इसके बारे में अधिक जानने के लिए पढ़ें :-

Pahadi Cuisine : काफुली ( Kafuli).

काफुली ( Kafuli) उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में प्रचलित पहाड़ी व्यंजनों में से एक है जो स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्यवर्धक होता है यह शाकाहारी व्यंजन में आता है यह मेथी के पत्तों एवं पालक को साथ उबालकर उसके मिश्रण से तैयार होता है, जिसको उत्तराखंड के खेतों से प्राप्त ऑर्गेनिक मसालों, अदरक हरी मिर्ची एवं दही के साथ साधारण मसालो के तड़के के साथ बनाया जाता है। इस पहाड़ी व्यंजन को आप रोटी या चावल किसी के साथ भी खा सकते हैं।

पालक एवं मेथी के पौष्टिक आहार के बारे में तो आप सब जानते ही हैं इसमें आयरन ,प्रोटीन ,विटामिन एवं फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। इसको उत्तराखंड में लोहे की कढ़ाई में चूल्हे पर बनाया जाता है हल्की आंच में जिसके कारण से उसका स्वाद कुछ अनोखा ही होता है।

Pahadi Cuisine : चेनसू ( Chainsoo ).

चेनसू ( Chainsoo ) उत्तराखंड के लगभग सभी घरों में इस पहाड़ी व्यंजन को भरपूर मात्रा में बनाया जाता है और खाया भी जाता है। चेनसू ( Chainsoo ) काली दाल को पीसकर बनाया जाता है। सर्वप्रथम काली दाल को तवे में बिना तेल के भूनकर फिर उसको पीसा जाता है। यदि यह सिलबट्टे में पीसआ जाए तो इसका स्वाद कुछ अलग ही होता है लेकिन आप इसको मिक्सी में भी पीस सकते हैं।

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अब एक कढ़ाई में देसी घी या तेल मैं इसको कुछ देर हल्का भूनकर इसमें स्वाद अनुसार नमक एवं मसाले ,लहसुन, धनिया आदि मिलाकर इसको हल्की आंच में कुछ समय के लिए अपने दीजिए यदि यह भी लोहे की कढ़ाई में और लकड़ी के चूल्हे में बने तो इसका स्वाद अत्यंत स्वादिष्ट होता है। इसको भी आप चावल या रोटी के साथ आनंद से खा सकते हैं।

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Pahadi Cuisine : गेथा के परांठे (Gahat ke parathe).

जहां उत्तर भारत में सर्वाधिक प्रचलित आलू एवं प्याज के पराठे है, लेकिन यदि उत्तराखंड की बात करें तो यहां पाई जाने वाली क्षेत्रीय दाल गेथा को भिगोकर उसको फिर सिलबट्टा या मिक्सी में पीसकर स्वाद अनुसार नमक एवं मसाले मिलाकर उसके परांठे या साधारण भरवा रोटी बहुत अधिक स्वादिष्ट एवं पौष्टिक होती है इसका सेवन आप चाय,हरी चटनी एवं दही के साथ कर सकते हैं।


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